नई दिल्ली/दुबई | दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक लाइनों में से एक, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज, इस समय भीषण जंग के मैदान में तब्दील हो चुकी है। तेल और गैस की वैश्विक आपूर्ति के लिए धड़कन माने जाने वाले इस रास्ते पर पिछले एक महीने से मौत का सन्नाटा और बारूद की गंध है। यहाँ फंसे भारतीय नाविकों ने जो दास्तां सुनाई है, वह किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है।
इंडिया टुडे और लल्लनटॉप की रिपोर्ट्स के अनुसार, कैप्टन राम कपूर (जो हिमाचल के कुल्लू-मनाली के रहने वाले हैं) ने वहां के भयावह हालात साझा किए हैं। उन्होंने बताया कि पर्शियन गल्फ में संघर्ष इतना बढ़ गया है कि आसमान से गिरते बम और मिसाइलों के कारण एक मिनट के भीतर 100 से ज्यादा धमाके सुनाई देते हैं। वर्तमान में करीब 3000 से ज्यादा जहाज इस इलाके में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है।
जंग के बीच जहाजों को निकालने के लिए कंपनियां खतरनाक पैंतरे अपना रही हैं:
AIS बंद करना: छोटी कंपनियां अपने नाविकों पर दबाव बना रही हैं कि वे अपना AIS (Automatic Identification System) बंद कर दें ताकि दुश्मन की रडार में न आएं।
किस्मत के भरोसे नेविगेशन: सिग्नल बंद होने के बाद जहाज केवल चार्ट और कंपास के सहारे अंधेरे में आगे बढ़ रहे हैं। यह तकनीक से ज्यादा किस्मत का खेल बन चुका है।
नौकरी का डर: नाविकों का आरोप है कि कंपनियां उन्हें भविष्य में नौकरी न देने की धमकी देकर इस 'डेथ ज़ोन' में जहाज ले जाने को मजबूर कर रही हैं।
इन चुनौतीपूर्ण हालातों के बीच भारतीय नाविकों के लिए राहत की खबर भारतीय नौसेना की मौजूदगी है।
ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा (Operation Urja Suraksha): भारत ने मार्च 2026 में इस मिशन की शुरुआत की है ताकि कच्चे तेल, LNG और LPG ले जा रहे भारतीय जहाजों को सुरक्षित निकाला जा सके।
पनडुब्बी और वॉरशिप: सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में नाविकों ने गर्व से दिखाया है कि कैसे भारतीय नौसेना की पनडुब्बियां और युद्धपोत (Warships) उनके आसपास सुरक्षा घेरा बनाए हुए हैं।
कैप्टन राम कपूर के मुताबिक, उनकी 4 महीने की ड्यूटी अब 5 महीने पार कर चुकी है। उन्होंने मार्मिक अपील करते हुए कहा:
"हम ग्लोबल ट्रेड की रीढ़ हैं, हमारा काम दुनिया तक जरूरत का सामान पहुँचाना है। लेकिन आज हमें बारूद के बीच अपनी जान दांव पर लगानी पड़ रही है। हम चाहते हैं कि यह जंग जल्द रुके।"
कैप्टन कपूर को अप्रैल के मध्य तक घर लौटना था, लेकिन समुद्री रास्ते बंद होने और खाड़ी देशों में एयरपोर्ट्स पर बढ़ते तनाव के कारण उनकी वापसी अनिश्चित हो गई है।
चोक पॉइंट: दुनिया का 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है।
तकनीकी चुनौती: नेविगेशन सिस्टम (GNSS) जैमिंग और समुद्री बारूदी सुरंगों (Mines) का खतरा।
भारत का रुख: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्पष्ट किया है कि नौसेना हर भारतीय टैंकर की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है।
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