3 साल में 44 लोको पायलट 'मेडिकल अनफिट', तनाव और काम के बोझ ने छीनी सेहत; महीनों से नई नियुक्ति का इंतजार

3 साल में 44 लोको पायलट 'मेडिकल अनफिट', तनाव और काम के बोझ ने छीनी सेहत; महीनों से नई नियुक्ति का इंतजार

कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल में लोको पायलटों की कार्यप्रणाली और उनके मानसिक-शारीरिक स्वास्थ्य को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। पिछले 3 वर्षों में मंडल के 44 लोको और सहायक लोको पायलट मेडिकल जांच में फेल (चिकित्सा विकोटिकृत) हो चुके हैं। विडंबना यह है कि अनफिट घोषित होने के 8 महीने बाद भी प्रशासन इन्हें वैकल्पिक पदों पर नियुक्ति देने में विफल रहा है।

वेतन मिल रहा, पर काम नहीं

नियमों के अनुसार, मेडिकल फेल होने के बाद रनिंग स्टाफ को अन्य विभागों में हल्के काम पर समायोजित किया जाना चाहिए। लेकिन कोटा मंडल में वर्तमान में 13 लोको पायलट महीनों से केवल ऑफिस में बैठकर वेतन और भत्ते ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें कहीं नियुक्त नहीं किया गया है। इनमें से 4 पायलट तो पिछले 8 महीने से आदेशों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन प्रभावित कर्मचारियों में मालगाड़ी के अलावा मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों के अनुभवी चालक भी शामिल हैं।

बढ़ता ग्राफ: हर महीने 1-2 मामले

सूत्रों के अनुसार, कुछ साल पहले तक साल भर में इक्का-दुक्का मामले ही मेडिकल फेल होने के आते थे। लेकिन अब स्थिति बेकाबू हो रही है:

  • मेडिकल फेल: 44 कर्मचारी (3 साल में)

  • स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS): 21 कर्मचारी

  • हल्के काम की अनुशंसा: 05 कर्मचारी

[Image: Medical examination of a railway employee]

तनाव और स्टाफ की कमी मुख्य कारण

लोको पायलटों का कहना है कि लगातार बढ़ता प्रशासनिक दबाव और स्टाफ की कमी उनकी सेहत बिगाड़ रही है। मुख्य कारण ये बताए जा रहे हैं:

  1. छुट्टी और रेस्ट का अभाव: स्टाफ कम होने के कारण समय पर साप्ताहिक विश्राम नहीं मिल पाता।

  2. अत्यधिक ड्यूटी: कई बार तय सीमा से अधिक घंटों तक ट्रेन चलानी पड़ती है।

  3. पारिवारिक दूरी: कई दिनों तक घर न लौट पाना और लगातार ड्यूटी का तनाव।

प्रशासन का पक्ष

मामले की गंभीरता को लेकर वरिष्ठ मंडल कार्मिक अधिकारी अविरल शर्मा का कहना है कि, "कर्मचारियों के मेडिकल फेल होने के कई तकनीकी और स्वास्थ्य कारण होते हैं। ऐसे स्टाफ को दूसरी जगह लगातार नियुक्तियां दी जा रही हैं। जो शेष बचे हैं, उन्हें भी जल्द ही समायोजित कर लिया जाएगा।"

विशेषज्ञों की राय: यदि समय रहते लोको पायलटों के कार्य-घंटों और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में रेल परिचालन पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।

#RailwaySafety #LocoPilotHealth #KotaRailway #WCR #IndianRailways #MedicalUnfit #StressAtWork #RailwayNews #StaffShortage #InfrastructureUpdate

G News Portal G News Portal
59 0

0 Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Leave a comment

Please Login to comment.

© G News Portal. All Rights Reserved.