कोटा। भारतीय रेलवे के मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले कोटा रेल मंडल ने 1 अप्रैल को अपनी स्थापना के 74 वर्ष पूरे कर लिए हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर मेनाल ऑफिसर क्लब में भव्य समारोह और प्रदर्शनी का आयोजन किया गया, जिसमें मंडल की सात दशकों की गौरवशाली विकास यात्रा को जीवंत रूप में प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी का उद्घाटन मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अनिल कालरा द्वारा किया गया। इस दौरान रेलवे के विभिन्न विभागों (वाणिज्य, परिचालन, आरपीएफ, चिकित्सा, इंजीनियरिंग आदि) द्वारा 13 स्टॉलें लगाई गईं।
मुख्य आकर्षण: 'कवच 4.0' स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली, अमृत भारत स्टेशन योजना और 2×25 केवी ओएचई विद्युतीकरण के लाइव मॉडल्स ने दर्शकों का ध्यान खींचा।
डिजिटल इंडिया: रेल मदद और रेल वन ऐप जैसी आधुनिक सुविधाओं को डिजिटल डिस्प्ले के माध्यम से समझाया गया।
मीडिया से मुखातिब होते हुए डीआरएम अनिल कालरा ने मंडल की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला:
"1952 में जब मंडल बना था, तब ट्रेनों की रफ्तार महज 50-60 किमी प्रति घंटा थी, लेकिन आज हम 180 किमी प्रति घंटे की रफ्तार के ट्रायल कर रहे हैं। कोटा देश का पहला ऐसा मंडल है जहाँ मथुरा से नागदा तक (549 किमी) 'कवच 4.0' सिस्टम पूर्णतः स्थापित किया जा चुका है।"
उन्होंने बताया कि अमृत भारत योजना के तहत कोटा मंडल के 19 स्टेशनों का कायाकल्प किया जा रहा है और अब रेलवे मैन्युअल से पूरी तरह कंप्यूटराइज्ड प्रणाली की ओर बढ़ चुका है।
स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में 70वां रेल सेवा पुरस्कार सप्ताह भी आयोजित हुआ। इसमें डीआरएम ने उत्कृष्ट और सराहनीय कार्य करने वाले 41 रेल कर्मचारियों को पुरस्कृत किया। सम्मान पाकर कर्मचारियों के चेहरे खिल उठे और उन्होंने भविष्य में और अधिक समर्पण के साथ कार्य करने का संकल्प लिया।
उत्सव का समापन मेनाल क्लब में आयोजित सांस्कृतिक संध्या और कवि सम्मेलन से हुआ। इसमें देश के ख्याति प्राप्त कवियों— जगदीश सोलंकी, सुरेन्द्र यादवेन्द्र, रावजात शत्रु, निशामुनि गौड़ और सलोनी ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
स्थापना: 1 अप्रैल 1952 (पश्चिम रेलवे के तहत)।
बदलाव: भाप इंजन से विद्युत इंजन और एकल लाइन से दोहरी विद्युतीकृत लाइन तक का सफर।
उपलब्धि: दिल्ली-मुंबई मुख्य मार्ग पर सुरक्षा की आधुनिकतम तकनीक 'कवच' का सफल क्रियान्वयन।
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