जयपुर/अलवर: राजस्थान और दिल्ली के बीच सफर करने वाले यात्रियों के लिए एक शानदार खबर है। केंद्र सरकार ने दिल्ली-अलवर नमो भारत रैपिड रेल ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) के पहले चरण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। लगभग 37,000 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत वाली इस परियोजना से दिल्ली-एनसीआर और राजस्थान के बीच कनेक्टिविटी का एक नया अध्याय शुरू होगा।
प्रोजेक्ट की योजना के अनुसार, इसे दो चरणों में क्रियान्वित किया जाएगा:
पहला चरण: यह कॉरिडोर दिल्ली के सराय काले खां से शुरू होकर धारूहेड़ा होते हुए बावल तक जाएगा। पहले यह केवल धारूहेड़ा तक प्रस्तावित था, लेकिन हरियाणा सरकार के विशेष आग्रह पर इसे बावल तक बढ़ाया गया है, जहाँ अब मुख्य टर्मिनल स्टेशन बनाया जाएगा।
दूसरा चरण: दूसरे फेज में राजस्थान के बहरोड़ को इस हाई-स्पीड नेटवर्क से जोड़ा जाएगा, जिससे अलवर जिले के निवासियों को सीधा लाभ मिलेगा।
यह कॉरिडोर तकनीक और सुविधा का बेजोड़ संगम होगा:
कुल लंबाई: 164 किलोमीटर लंबा ट्रैक।
स्टेशनों की संख्या: पूरे रूट पर कुल 22 स्टेशन होंगे।
भूमिगत स्टेशन: सफर को सुगम बनाने के लिए 5 स्टेशनों को जमीन के अंदर (Underground) बनाया जाएगा।
निर्माण एजेंसी: इसका निर्माण नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) द्वारा किया जाएगा।
बावल में टर्मिनल स्टेशन बनने से इस औद्योगिक बेल्ट को सबसे ज्यादा फायदा होगा। आरआरटीएस के जरिए दिल्ली से अलवर तक का सफर मात्र कुछ घंटों में सिमट जाएगा। जानकारों का मानना है कि इस परियोजना से व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी और लाखों नौकरीपेशा लोगों को राहत मिलेगी।
खास बात: दिल्ली-अलवर कॉरिडोर के निर्माण कार्य की शुरुआत इसी साल (2026) होने की उम्मीद जताई जा रही है।
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