जयपुर। राजस्थान में जून महीने में दक्षिण-पश्चिमी मानसून की दस्तक और झमाझम बारिश का दौर शुरू होने वाला है। इसे देखते हुए जल संसाधन विभाग और प्रशासन ने मानसून पूर्व (Pre-Monsoon) तैयारियां तेज कर दी हैं। प्रदेश के छोटे-बड़े बांधों की मरम्मत और रखरखाव का काम युद्ध स्तर पर जारी है, जिसे जून के पहले सप्ताह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस बीच, जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों ने चिंता भी बढ़ा दी है। मानसून 2025 की विदाई के बाद से लेकर अब तक प्रदेश के 316 बांध लगभग पूरी तरह सूख चुके हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि पिछले साल (2024) की तुलना में इस वर्ष बांधों में करीब 11% अधिक पानी का स्टोरेज उपलब्ध है।
जल संसाधन विभाग के अनुसार, राज्य के कुल 692 छोटे-बड़े बांधों में से लगभग आधे बांधों का पेटा सूख चुका है। बांधों का क्षमता अनुसार वर्गीकरण इस प्रकार है:
बड़े और मध्यम बांध (4.25 MQM से अधिक क्षमता): कुल 285 बांधों में से 90 बांध पूरी तरह खाली हैं, जबकि 182 बांध आंशिक रूप से भरे हैं। बीते मानसून में इनमें से केवल 13 बांध ही पूरी तरह ओवरफ्लो हुए थे।
छोटे बांध (4.25 MQM से कम क्षमता): कुल 407 बांधों में से 226 बांध पूर्ण रूप से रीते (खाली) हैं। पिछले मानसून में इनमें से 166 बांधों में आंशिक पानी आया था और महज 15 बांध ओवरफ्लो हो पाए थे।
| क्षमता | कुल संख्या | पूर्ण रूप से खाली | आंशिक रूप से भरे | पूर्ण रूप से भरे (ओवरफ्लो) |
| 4.25 MQM से अधिक | 285 | 90 | 182 | 13 |
| 4.25 MQM से कम | 407 | 226 | 166 | 15 |
| कुल योग | 692 | 316 | 348 | 28 |
भले ही 316 बांध सूख चुके हैं, लेकिन बीते वर्ष (2025) में मानसून की बंपर मेहरबानी के चलते राज्य के जल स्तर में सुधार दर्ज किया गया है।
तुलनात्मक स्टोरेज: जून 2024 में जहां राज्य के बांधों में कुल जल संग्रहण क्षमता का महज 32.26% पानी बचा था, वहीं जून 2025 (15 जून की स्थिति) तक यह आंकड़ा 43.64% दर्ज किया गया। यानी पिछले साल के मुकाबले इस बार करीब 11% अधिक पानी का बैकअप मौजूद है।
22 प्रमुख बांधों की स्थिति: कुल क्षमता 8104.99 MQM के मुकाबले वर्तमान में 5249.61 MQM (64.77%) पानी उपलब्ध है।
मध्यम बांधों की स्थिति: कुल क्षमता 4007.72 MQM के मुकाबले वर्तमान में 1062.38 MQM (26.51%) पानी है।
छोटे बांधों की स्थिति: कुल क्षमता 822.03 MQM के मुकाबले वर्तमान में केवल 121.65 MQM (14.80%) पानी ही शेष है।
मौसम विज्ञानियों के अनुसार, इस साल भी राजस्थान में मानसून के बेहतर रहने के मजबूत संकेत हैं। जल संसाधन विभाग को उम्मीद है कि आगामी सीजन में बारिश के चलते इन सूखे पड़े बांधों में एक बार फिर पानी की बंपर आवक होगी। फिलहाल, प्रशासन का पूरा ध्यान जून के पहले सप्ताह तक सभी बांधों के मेंटेनेंस वर्क को पूरा करने पर केंद्रित है ताकि वर्षा जल का अधिकतम संग्रहण सुरक्षित रूप से किया जा सके।
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