कोटा/चित्तौड़गढ़। कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल खंड पर पारसोली और बस्सी बेरीसाल स्टेशनों के बीच ट्रेन को पलटाने की बड़ी साजिश के मामले में बुधवार को उच्चस्तरीय जांच का दौर चला। घटना की गंभीरता को देखते हुए कोटा डीआरएम अनिल कालरा और चित्तौड़गढ़ आईजी ने स्वयं घटनास्थल का दौरा किया और सुरक्षा विशेषज्ञों से विस्तृत फीडबैक लिया।
घटनास्थल पर केवल पुलिस ही नहीं, बल्कि एफएसएल (FSL), साइबर सेल और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट्स की टीमों ने भी डेरा डाला। टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं:
पटरी पर रखी गई लोहे की लाइन से फिंगरप्रिंट्स लिए गए हैं।
साइबर टीम मोबाइल टावर डंप और अन्य तकनीकी पहलुओं के जरिए घटना के समय इलाके में सक्रिय संदिग्धों की पहचान करने में जुटी है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पटरी पर रखी गई रेल लाइन का वजन लगभग 290 किलो और लंबाई करीब 15 फीट (5.7 मीटर) थी। विशेषज्ञों का मानना है कि इतना भारी वजन उठाकर पटरी पर रखना किसी एक या दो व्यक्ति का काम नहीं है। आशंका जताई जा रही है कि इसमें कम से कम आधा दर्जन (6 लोग) शामिल थे और संभवतः उन्होंने लाइन उठाने के लिए किसी विशेष उपकरण का उपयोग किया होगा।
यह घटना मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे ओराई नदी पुलिया पर हुई थी। अज्ञात बदमाशों ने एक मालगाड़ी को गिराने की नीयत से ट्रैक पर रेल लाइन रख दी थी। गनीमत रही कि मालगाड़ी से टकराकर वह लाइन एक तरफ छिटक गई, अन्यथा पूरी ट्रेन नदी में गिर सकती थी और एक बड़ा हादसा हो जाता।
घटना के 48 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। बस्सी थाना पुलिस, आरपीएफ (RPF) और जीआरपी (GRP) की संयुक्त टीमें आसपास के जंगलों और गांवों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। बस्सी थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ भारतीय रेल अधिनियम और अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है।
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