जयपुर | 1 अप्रैल, 2026 राजस्थान में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों की राह देख रहे लोगों के लिए बुरी खबर है। राज्य सरकार ने ओबीसी (OBC) आयोग का कार्यकाल एक बार फिर बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 तक कर दिया है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा मंगलवार देर रात जारी इस आदेश के बाद अब प्रदेश में अक्टूबर 2026 से पहले चुनाव होने की संभावना न के बराबर रह गई है।
चुनावों में ओबीसी आरक्षण के वर्गीकरण के लिए इस आयोग का गठन 9 मई 2025 को किया गया था।
लक्ष्य: आयोग को 3 महीने में रिपोर्ट देनी थी।
विस्तार: पहले कार्यकाल दिसंबर 2025, फिर 31 मार्च 2026 और अब तीसरी बार बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया 15 अप्रैल 2026 तक पूरी कर ली जाए। लेकिन आयोग का कार्यकाल सितंबर तक बढ़ने से कोर्ट की समय सीमा का उल्लंघन तय माना जा रहा है। सरकार के गलियारों में चर्चा है कि 'वन स्टेट वन इलेक्शन' के फॉर्मूले के तहत सभी चुनाव एक साथ कराने की मंशा के कारण यह देरी की जा रही है।
इस फैसले पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए:
आरोप: सरकार निकाय चुनावों में हार के डर से जानबूझकर देरी कर रही है और आयोग को जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं करा रही।
कोर्ट की शरण: डोटासरा ने कहा कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना कर रही है और कांग्रेस इस मामले को लेकर फिर से शीर्ष अदालत जाएगी।
जन जागरण अभियान: कांग्रेस आज से प्रदेशभर में एक महीने तक 'संगठन बढ़ाओ, लोकतंत्र बचाओ' अभियान चलाकर सरकार की घेराबंदी करेगी।
कुल ग्राम पंचायतें: 14,403
पंचायत समितियां: 457
शहरी वार्ड: 10,000 से ज्यादा
कार्यकाल: 12 जिला परिषदों और 130 पंचायत समितियों का कार्यकाल दिसंबर 2026 में खत्म होना है।
राजनीतिक गलियारा: जानकारों का मानना है कि ओबीसी आरक्षण की पेचीदगियां और जातिगत आंकड़ों का संकलन इस देरी का मुख्य तकनीकी कारण है, लेकिन इसके पीछे गहरी चुनावी रणनीति भी छिपी हो सकती है।
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