कोटा: कोटा जंक्शन पर इन दिनों रेल यात्रियों को एक अजीबोगरीब और थका देने वाली समस्या का सामना करना पड़ रहा है। प्लेटफार्म पर लगे कोच डिस्प्ले बोर्ड (Coach Guidance System) और ट्रेन के रुकने के स्थान में भारी अंतर होने के कारण यात्रियों को सामान लेकर प्लेटफार्म पर 'दौड़' लगानी पड़ रही है।
यात्रियों की सबसे बड़ी शिकायत प्लेटफार्म नंबर 3 को लेकर है। यहाँ आने वाली अधिकांश ट्रेनों के लोको पायलट (चालक) कोच डिस्प्ले की अनदेखी कर ट्रेन को निर्धारित मार्क से काफी आगे या पीछे खड़ा कर रहे हैं।
बुजुर्गों और बच्चों पर आफत: जब ट्रेन अपने डिस्प्ले बोर्ड से 50-100 मीटर दूर खड़ी होती है, तो भारी सामान के साथ बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को कोच पकड़ने के लिए भागना पड़ता है।
ट्रेन छूटने का डर: स्टॉल संचालकों का कहना है कि ट्रेन का ठहराव कम समय का होता है, ऐसे में कोच तक पहुँचने की आपाधापी में कई बार यात्रियों की ट्रेन छूटने की नौबत आ जाती है।
ट्रेनों के गलत जगह खड़े होने का असर यात्रियों की खान-पान की जरूरतों पर भी पड़ रहा है।
प्लेटफार्म पर मौजूद स्टॉल और वेंडिंग पॉइंट डिस्प्ले बोर्ड के हिसाब से व्यवस्थित हैं।
ट्रेन के दूर खड़े होने से यात्रियों को पानी या खाने का सामान लेने के लिए लंबा सफर तय करना पड़ता है, जिससे वे अक्सर रिस्क नहीं लेते और भूखे-प्यासे ही सफर करने को मजबूर होते हैं।
"हमने अधिकारियों से कई बार शिकायत की है कि ट्रेनें डिस्प्ले बोर्ड के अनुसार नहीं रुक रही हैं, जिससे यात्रियों के साथ-साथ हमारा व्यापार भी प्रभावित हो रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।"
— स्टॉल संचालक, कोटा स्टेशन
आमतौर पर प्लेटफार्म पर ट्रेनों के रुकने के लिए 'स्टॉप बोर्ड' लगे होते हैं। यदि ट्रेन वहाँ खड़ी हो रही है और डिस्प्ले मेल नहीं खा रहा, तो यह तकनीकी गड़बड़ी है। लेकिन यदि लोको पायलट बोर्ड को नजरअंदाज कर रहे हैं, तो यह सीधे तौर पर परिचालन विभाग की लापरवाही है।
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