जयपुर | जयपुर पुलिस कमिश्नरेट ने देश के सबसे बड़े साइबर घोटालों में से एक 'डीजीएफटी-आइसीईगेट स्क्रिप घोटाले' का सनसनीखेज खुलासा किया है। इस संगठित अंतरराष्ट्रीय गिरोह ने सुरक्षित सरकारी पोर्टल्स में सेंध लगाकर करीब 400 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया है। पुलिस ने इस मामले में अब तक 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके तार दुबई से जुड़े होने के संकेत मिले हैं।
पुलिस कमिश्नर सचिन मित्तल के अनुसार, ठगों ने बेहद शातिराना तरीके से सरकारी सिस्टम को निशाना बनाया:
फर्जी DSC का खेल: आरोपियों ने फर्जी आधार और पैन कार्ड का उपयोग कर 400 से अधिक जाली डिजिटल सिग्नेचर सर्टिफिकेट (DSC) तैयार किए।
प्रोफाइल हैकिंग: गिरोह सबसे पहले लक्षित कंपनी की प्रोफाइल में घुसकर मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी बदल देता था, जिससे कंपनी का अपने खाते से नियंत्रण खत्म हो जाता।
अनधिकृत लॉगिन: जाली डिजिटल हस्ताक्षरों के जरिए DGFT और ICEGATE जैसे सुरक्षित पोर्टल्स में लॉगिन कर निर्यातकों (Exporters) के खातों तक पहुंच बनाई गई।
स्क्रिप्स ट्रांसफर: लॉगिन करने के बाद, 'ड्यूटी क्रेडिट स्क्रिप्स' को फर्जी खातों में ट्रांसफर कर लिया जाता था।
स्पेशल पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश ने बताया कि इस रैकेट का संचालन केवल भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी हो रहा था। जांच में राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और दुबई के आईपी एड्रेस (IP Address) का उपयोग पाया गया है।
शिकायत जिसने खोला राज: > यह मामला तब सामने आया जब 'मरुधर क्वार्ट्ज सर्फेसेस प्रा. लि.' के निदेशक सौरभ बाफना ने शिकायत दर्ज कराई। उनके खाते से बिना लॉगिन किए ही 18 दिसंबर 2025 को 17.88 लाख रुपये की पांच स्क्रिप्स पार कर दी गई थीं। जांच में पता चला कि अप्रैल 2025 में भी इसी तरह 15.80 लाख रुपये की चोरी हुई थी।
पुलिस ने जोधपुर और पाली सहित कई शहरों में दबिश देकर अब तक 5 मुख्य आरोपियों को सलाखों के पीछे पहुँचाया है:
सुल्तान खान (जोधपुर)
नंद किशोर (जोधपुर)
अशोक कुमार भंडारी (जोधपुर)
प्रमोद खत्री (जोधपुर)
निर्मल सोनी (पाली)
पुलिस फिलहाल 13 अन्य संदिग्धों की तलाश में सीकर और अन्य इलाकों में छापेमारी कर रही है। राहत की बात यह रही कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी गई पूरी राशि को फ्रीज कर मूल खातों में वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि निर्यातकों और व्यवसायियों को अपने डिजिटल सिग्नेचर और पोर्टल लॉगिन की नियमित जांच करनी चाहिए। यदि प्रोफाइल में मोबाइल नंबर या ईमेल में कोई भी अनधिकृत बदलाव दिखे, तो तुरंत साइबर सेल को सूचित करें।
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