कोटा। रेलवे प्रशासन द्वारा न्यायिक आदेशों की कथित अनदेखी का एक गंभीर मामला सामने आया है। कोटा मंडल के वरिष्ठ अनुभव अभियंता (बिजली) के पद से सेवानिवृत्त एल्विन गिरी को अदालत से जीत मिलने के बाद भी उनके हक का भुगतान नहीं किया गया है। अब इस मामले में जबलपुर मुख्यालय और कोटा मंडल के जिम्मेदार अधिकारियों पर अवमानना की तलवार लटक रही है।
यह मामला काफी पुराना और पेचीदा है, जिसकी जड़ें सेवा बहाली से जुड़ी हैं:
बर्खास्तगी और बहाली: भोपाल रेल मंडल ने एल्विन गिरी सहित 125 कर्मचारियों की नियुक्ति को फर्जी मानते हुए उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
सुप्रीम कोर्ट का दखल: लंबी कानूनी लड़ाई के बाद, दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन सभी कर्मचारियों को वापस नौकरी पर रखा गया।
वेतन वृद्धि की रोक: बहाली तो हो गई, लेकिन रेलवे ने उन्हें नियमानुसार वेतन वृद्धि (Increment) का लाभ नहीं दिया।
एल्विन गिरी ने अपने वेतन ग्रेड (1400-2300) में बैकलॉग भुगतान के लिए कैट (CAT) जबलपुर में दावा किया था।
3 जुलाई 2024: ट्रिब्यूनल ने एल्विन के पक्ष में फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट का रुख: रेलवे ने इस फैसले को जबलपुर हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन हाईकोर्ट ने रेलवे की अपील को खारिज करते हुए निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा।
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जब रेलवे ने भुगतान नहीं किया, तो एल्विन गिरी ने आदेश की अवमानना का मामला दर्ज कराया है।
"यह मामला रेलवे कर्मचारियों के वेतन निर्धारण और बैकलॉग पेमेंट पर केंद्रित है, जो अक्सर प्रशासनिक लापरवाही या नीतिगत विवादों के कारण उलझ जाते हैं।"
— मनोज शर्मा, अधिवक्ता
इस मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को तय की गई है। यदि अदालत में अवमानना सिद्ध होती है, तो:
जबलपुर मुख्यालय और कोटा मंडल के जिम्मेदार अधिकारियों को सजा हो सकती है।
अधिकारियों पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है।
अथवा सजा और जुर्माना दोनों की कार्रवाई संभव है।
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