“रणथम्भौर बाघ रक्षक कार्यक्रम” से बढ़ी भागीदारी: विद्यार्थियों और ग्रामीणों को दिया गया सहअस्तित्व का संदेश

“रणथम्भौर बाघ रक्षक कार्यक्रम” से बढ़ी भागीदारी: विद्यार्थियों और ग्रामीणों को दिया गया सहअस्तित्व का संदेश

सवाई माधोपुर | 07 अप्रैल 2026

रणथम्भौर के जंगलों और वन्यजीवों को सुरक्षित रखने के लिए अब स्थानीय समुदाय और स्कूली बच्चों को 'बाघ रक्षक' के रूप में तैयार किया जा रहा है। रणथम्भौर बाघ संरक्षण कार्यक्रम के तहत जिले के ग्रामीण अंचलों और विद्यालयों में व्यापक जन-जागरूकता गतिविधियों का संचालन किया जा रहा है, ताकि वन्यजीव संरक्षण को जन-आंदोलन बनाया जा सके।

अधिकारियों के निर्देशन में विशेष पहल

यह अभियान मुख्य वन संरक्षक शारदा प्रताप सिंह एवं उप वन संरक्षक मानस सिंह के निर्देशन में चलाया जा रहा है। उप वन संरक्षक मानस सिंह ने बताया कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी और स्थानीय ग्रामीणों को संरक्षण के प्रति जागरूक कर उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इससे रणथम्भौर क्षेत्र में मानव-वन्यजीव सहअस्तित्व को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।

इन क्षेत्रों में पहुँची जागरूकता की लहर

कार्यक्रम के तहत जिले के विभिन्न ग्रामीण और शैक्षणिक क्षेत्रों में गतिविधियाँ आयोजित की गईं:

  • ग्रामीण क्षेत्र: भूरी पहाड़ी, खिदरपुर जादौन, एण्डवा और तालडा जैसे गांवों में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए।

  • विद्यालय: राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय भावपुर, राजकीय सीनियर सैकण्डरी स्कूल बहरावंडा खुर्द, रांवल, लहसोडा और सवाई माधोपुर स्थित मदरसा सी. सै. स्कूल के विद्यार्थियों ने इसमें हिस्सा लिया।

नवाचारी गतिविधियों से जुड़ाव

सोशियोलॉजिस्ट ममता साहू के नेतृत्व में बच्चों और ग्रामीणों को जोड़ने के लिए कई दिलचस्प तरीके अपनाए गए:

  1. फिल्म प्रदर्शन व प्रश्नोत्तरी: वन्यजीवों के जीवन पर आधारित फिल्में दिखाई गईं और क्विज प्रतियोगिताएं हुईं।

  2. कला और संवाद: चित्रकला प्रतियोगिता और वन भ्रमण के जरिए बच्चों को प्रकृति के करीब लाया गया।

  3. पर्यावरण का संदेश: प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों के बारे में बताते हुए स्वच्छता बनाए रखने की अपील की गई।

प्लास्टिक मुक्त जीवनशैली पर जोर

वन्यजीवों के लिए सबसे बड़ा खतरा बन रहे प्लास्टिक को हटाने के लिए कार्यक्रम के दौरान विशेष संदेश दिया गया। सहभागियों को वन्यजीव संरक्षण संबंधी बुकलेट, स्टीकर और जूट कैरी बैग वितरित किए गए, ताकि प्लास्टिक के इस्तेमाल को कम किया जा सके और पर्यावरण संतुलन बना रहे।

वक्ताओं ने जोर दिया कि पारिस्थितिकी तंत्र में बाघों की भूमिका न केवल वन संरक्षण के लिए, बल्कि मानव जीवन के पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी अनिवार्य है।


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