कोटा-नागदा रेलखंड: क्रेन 60 टन की और गर्डर 80 का; प्रशासनिक चूक से 'ब्लॉक' फेल, 9 ट्रेनों के यात्री बेहाल

कोटा-नागदा रेलखंड: क्रेन 60 टन की और गर्डर 80 का; प्रशासनिक चूक से 'ब्लॉक' फेल, 9 ट्रेनों के यात्री बेहाल

कोटा | 15 मई, 2026 कोटा-नागदा रेलखंड पर कंवलपुरा और दरा स्टेशनों के बीच गुरुवार को अंडर ब्रिज निर्माण के दौरान बड़ी प्रशासनिक अदूरदर्शिता सामने आई। तकनीकी तालमेल की कमी और क्षमता से कम संसाधनों के उपयोग के कारण लिया गया रेल ब्लॉक पूरी तरह फेल हो गया। इसका खामियाजा भीषण गर्मी में 9 ट्रेनों के हजारों यात्रियों को घंटों तक ट्रेन में फंसकर भुगतना पड़ा।


अंकगणित की चूक: भारी पड़ा 20 टन का अंतर

मौके पर मौजूद जानकारी के अनुसार, निर्माण स्थल पर करीब 80 टन वजनी स्टील का गर्डर लॉन्च किया जाना था। लेकिन चौंकाने वाली बात यह रही कि इसे उठाने के लिए महज 60 टन क्षमता वाली क्रेन मंगवाई गई।

  • परिणाम: जब क्रेन ने गर्डर उठाने की कोशिश की, तो वजन अधिक होने के कारण गर्डर हिला तक नहीं।

  • ब्लॉक रद्द: घंटों की मशक्कत और विफलता के बाद अधिकारियों ने ब्लॉक रद्द करने का निर्णय लिया। इसके बाद हटाई गई रेल लाइनों को आनन-फानन में दोबारा फिट किया गया ताकि रेल संचालन शुरू हो सके।


9 ट्रेनें घंटों लेट, यात्रियों में हाहाकार

इस अव्यवस्था के कारण अप और डाउन दोनों लाइनों पर ट्रैफिक बुरी तरह प्रभावित हुआ। अप लाइन पर ब्लॉक निर्धारित समय से 1 घंटा 20 मिनट और डाउन लाइन पर 1 घंटा अधिक 'पिट' गया।

प्रभावित ट्रेनों का हाल:

  • एर्नाकुलम-निजामुद्दीन (22655): 6:30 घंटे देरी।

  • गोरखपुर-बड़ोदरा (09112): 8:30 घंटे देरी।

  • कोटा-रतलाम (19104): 5:10 घंटे देरी।

  • जोधपुर-इंदौर इंटरसिटी (12466): 4:30 घंटे देरी।

  • कोटा-अकलेरा (59840): 4:30 घंटे देरी।

  • दादर-निजामुद्दीन (0400): 6:30 घंटे देरी।

  • झालावाड़-श्रीगंगानगर (22997): 1 घंटा देरी।

भीषण गर्मी के बीच ट्रेनें खड़ी रहने से यात्री पीने के पानी और खाने-पीने के सामान के लिए तरस गए। स्टेशनों पर यात्रियों की भारी भीड़ और आक्रोश देखा गया।


रेलवे का पक्ष: "तकनीकी समस्या बनी कारण"

वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Sr. DCM) सौरभ जैन ने बताया कि यह कार्य तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल स्थल पर किया जा रहा था। कार्य के दौरान प्रयुक्त भारी क्रेन में अचानक आई तकनीकी समस्या के कारण गर्डर लॉन्चिंग निर्धारित समय में पूरी नहीं हो सकी।

उन्होंने बताया कि पहले दिन का कार्य आंशिक रूप से सफल रहा है और शेष गर्डर लॉन्चिंग का कार्य आगामी दिनों में नया ब्लॉक लेकर किया जाएगा।


सवालिया निशान: किसकी लापरवाही?

इस घटना ने कोटा मंडल के इंजीनियरिंग विभाग की प्लानिंग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं:

  1. जब गर्डर 80 टन का था, तो 60 टन की क्रेन के भरोसे ब्लॉक क्यों लिया गया?

  2. क्या काम शुरू करने से पहले क्रेन और भार का तकनीकी मूल्यांकन नहीं किया गया था?

  3. हजारों यात्रियों की परेशानी और रेलवे के राजस्व के नुकसान का जिम्मेदार कौन है?

फिलहाल, शुक्रवार को ब्लॉक की स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन इस घटना ने यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं और रेलवे की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है।


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