कोटा रेल मंडल: एक जैसी गलती, पर सजा अलग-अलग; कार्मिक विभाग की दोहरी कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

कोटा रेल मंडल: एक जैसी गलती, पर सजा अलग-अलग; कार्मिक विभाग की दोहरी कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

 

कोटा। रेलवे में अनुशासन बनाए रखने के लिए नियम सबके लिए समान होने चाहिए, लेकिन कोटा मंडल रेल प्रबंधक (DRM) कार्यालय के कार्मिक विभाग में कुछ और ही नजारा देखने को मिल रहा है। समान प्रकृति की वित्तीय अनियमितताओं में अलग-अलग रेलकर्मियों को अलग-अलग दंड दिए जाने से विभाग की निष्पक्षता पर प्रश्नचिन्ह लग रहे हैं।

केस 1: 2 साल बाद 'मेजर चार्जशीट' और रुकी पदोन्नति

लगभग दो वर्ष पूर्व एक महिला रेलकर्मी द्वारा एक नियमित कर्मचारी को लाखों रुपये का अतिरिक्त भुगतान (Over Payment) कर दिया गया था।

  • कार्रवाई: सतर्कता विभाग की जांच के बाद राशि की रिकवरी तो हो गई, लेकिन दो साल बाद अब उस महिला कर्मचारी को 'मेजर चार्जशीट' थमा दी गई है।

  • असर: हाल ही में पदोन्नति के लिए उसका नाम प्रस्तावित था, लेकिन इस कार्रवाई के चलते उसका परिणाम 'सील्ड कवर' में रख दिया गया है और वह फिलहाल अपात्र मानी गई है।

  • विवाद: इसी मामले में एक मुख्य कार्यालय अधीक्षक को सेवानिवृत्ति के करीब देखते हुए मेजर चार्जशीट को माइनर में बदलकर केवल दो पास बंद करने का दंड दिया गया, जबकि महिला कर्मचारी के साथ कड़ा रुख अपनाया गया।

केस 2: गंभीर चूक, फिर भी 'माइनर चार्जशीट' और पदोन्नति

वहीं दूसरी ओर, एक अन्य महिला कर्मचारी की लापरवाही का मामला सामने आया जिसमें स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले चुके एक कर्मचारी को लगातार तीन महीने तक नियमित वेतन जारी होता रहा।

  • गंभीरता: VRS के आदेश पहले ही जारी हो चुके थे, फिर भी नाम न हटाना बड़ी प्रशासनिक चूक मानी जानी चाहिए।

  • कार्रवाई: इस गंभीर मामले में संबंधित महिला कर्मचारी को केवल 'माइनर चार्जशीट' दी गई।

  • विवाद: दंड मिलने के बावजूद उसे बाद में पदोन्नत (Promote) भी कर दिया गया, जो पहले मामले के ठीक उलट है।

कर्मचारियों में पनप रहा असंतोष

रेलकर्मियों का कहना है कि जब दोनों ही मामले वित्तीय अनियमितता और लापरवाही से जुड़े हैं, तो दंड और पदोन्नति के निर्णयों में इतनी भिन्नता क्यों?

"यदि मामलों की प्रकृति और वित्तीय हानि की स्थिति समान है, तो अनुशासनात्मक कार्रवाई में भी एकरूपता होनी चाहिए। भेदभावपूर्ण निर्णयों से कर्मचारियों का मनोबल गिरता है और विभाग की छवि धूमिल होती है।"

DRM कार्यालय के रेल कर्मचारी

कार्मिक विभाग की इस 'पिक एंड चूज' (Pick and Choose) नीति ने अब एक बड़े विवाद का रूप ले लिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन विसंगतियों पर क्या स्पष्टीकरण देता है।


#RailwayNews #KotaRailway #DRMKota #PersonnelDepartment #RailwayEmployee #Injustice #WCR #IndianRailways #CorruptionWatch #RailwayRules

G News Portal G News Portal
42 0

0 Comments

No comments yet. Be the first to comment!

Leave a comment

Please Login to comment.

© G News Portal. All Rights Reserved.