कोटा। रेलवे में स्थानांतरण के नए नियमों को लेकर प्रशासन और कर्मचारी संगठनों के बीच तल्खी बढ़ती नजर आ रही है। कोटा मंडल द्वारा हाल ही में जारी की गई स्थानांतरण नीति (Transfer Policy) के विरोध में वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन ने मोर्चा खोल दिया है। यूनियन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस नीति में संशोधन नहीं किया गया, तो रेल कर्मचारी सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
यूनियन के महामंत्री मुकेश गालव ने इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक (DRM) को एक औपचारिक पत्र लिखा है। विवाद की जड़ प्रशासन द्वारा जारी वह आदेश है, जिसमें पदोन्नति (Promotion) के बाद नए स्थान पर कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से एक वर्ष की 'कूलिंग ऑफ अवधि' (Cooling-off Period) अनिवार्य कर दी गई है।
इस नीति के प्रमुख बिंदु जिन पर विरोध है:
पदोन्नति पर नई जगह पदस्थापना के बाद, कर्मचारी एक वर्ष तक किसी अन्य जगह स्थानांतरण के लिए आवेदन नहीं कर सकेगा।
इस अवधि के दौरान 'नेम नोट' (Name Note) करने का कोई भी आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
यह नियम रोटेशनल, स्वयं की प्रार्थना (Own Request) और प्रशासनिक स्थानांतरण—तीनों श्रेणियों पर लागू होगा।
महामंत्री मुकेश गालव का कहना है कि जब इस नियम का पहले विरोध किया गया था, तब रेल प्रशासन ने इसमें संशोधन करने का आश्वासन दिया था। लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी अब तक नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यूनियन का मानना है कि यह नियम कर्मचारियों के हितों के खिलाफ है और इससे उनकी व्यक्तिगत व पारिवारिक समस्याओं का समाधान बाधित होगा।
"प्रशासन ने संशोधन का वादा किया था, लेकिन अब तक चुप्पी साधे हुए है। यदि जल्द ही इस दमनकारी नीति को वापस नहीं लिया गया या इसमें सुधार नहीं हुआ, तो यूनियन उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी।" — मुकेश गालव, महामंत्री, रेलवे एम्पलाइज यूनियन
यूनियन ने चेतावनी दी है कि रेल कर्मचारियों में इस आदेश को लेकर भारी आक्रोश है। यदि प्रशासन ने समय रहते इस पर संज्ञान नहीं लिया, तो मंडल स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किए जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी रेल प्रशासन की होगी।
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