कोटा/लाखेरी। लाखेरी स्टेशन यार्ड में रविवार को मालगाड़ी के तीन डिब्बे बेपटरी होने की घटना को रेलवे ने बेहद गंभीरता से लिया है। सोमवार को मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अनिल कालरा ने घटनास्थल का सघन निरीक्षण किया और हादसे के तकनीकी कारणों की जांच की।
डीआरएम अनिल कालरा ने उस विशेष 'पॉइंट' का बारीकी से निरीक्षण किया जहाँ से मालगाड़ी के पहिए पटरी से नीचे उतरे थे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने:
स्टेशन पर चल रहे निर्माण कार्यों और पैनल (Panel) रूम की जांच की।
नॉन-इंटरलॉकिंग (NI) कार्यों की प्रगति का जायजा लिया।
रेलवे अधिकारियों, संबंधित कर्मचारियों और एसीसी (ACC) सीमेंट फैक्ट्री के स्टाफ से आमने-सामने सवाल-जवाब किए।
शुरुआती जांच रिपोर्ट ने हादसे की परतें खोल दी हैं। यह स्पष्ट हुआ है कि शंटिंग के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया:
सिग्नल की अनदेखी: बिना सिग्नल दिए ही ट्रेन को आगे बढ़ाया गया।
खुला पॉइंट: ट्रैक का पॉइंट सही तरीके से सेट नहीं था, जिसके कारण डिब्बे पटरी छोड़ गए।
जिम्मेदारी: इस गंभीर चूक के लिए प्रथम दृष्टया स्टेशन मास्टर और पॉइंट्समैन को जिम्मेदार माना जा रहा है।
हादसे के वक्त सीमेंट फैक्ट्री का इंजन और चालक मालगाड़ी की शंटिंग कर रहे थे। डिब्बे गिरते ही दोनों चालक इंजन छोड़कर मौके से फरार हो गए थे। रेलवे अधिकारियों ने कड़ी मशक्कत के बाद उन्हें ढूंढ निकाला और पूछताछ के लिए बुलाया। सूत्रों के अनुसार, रेलवे इस दुर्घटना से हुए ट्रैक और बुनियादी ढांचे के नुकसान की भरपाई के लिए सीमेंट फैक्ट्री से वसूली करने की तैयारी कर रहा है।
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