कोटा-चित्तौड़गढ़ रेल खंड पर रविवार सुबह एक बड़ा रेल हादसा होने से बाल-बाल टल गया। जालंद्री और श्रीनगर रेलवे स्टेशनों के बीच से गुजर रही एक मालगाड़ी के पहियों से अचानक तेज धुआँ निकलने लगा। गनीमत यह रही कि ट्रैक पर तैनात गेटमैन ने समय रहते इस खतरे को भांप लिया और तुरंत इसकी सूचना स्टेशन मास्टर को देकर ट्रेन को रुकवाया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार सुबह करीब 11:40 बजे कोटा की तरफ आ रही एक मालगाड़ी जालंद्री और श्रीनगर के बीच स्थित गेट नंबर 55 से गुजर रही थी। इस दौरान वहाँ ड्यूटी पर तैनात गेटमैन रमेश चंद मीणा की नजर मालगाड़ी के पहियों से तेजी से निकलते धुएँ पर पड़ी। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रमेश चंद ने बिना एक पल गंवाए इसकी सूचना तुरंत श्रीनगर स्टेशन मास्टर को दी।
कंट्रोल रूम और स्टेशन मास्टर की सूचना पर मालगाड़ी को तुरंत श्रीनगर स्टेशन पर आपातकालीन रूप से रुकवाया गया। ट्रेन रुकने के बाद जब लोको पायलट और तकनीकी स्टाफ ने पहियों की जांच की, तो सामने आया कि गाड़ी का ब्रेक जाम (Break Binding) हो गया था। ब्रेक जाम होने की वजह से पहियों का पटरी और ब्रेक शू के साथ लगातार घर्षण (Friction) हो रहा था, जिससे भयानक धुआँ उठ रहा था।
इसके बाद तकनीकी टीम ने तुरंत ब्रेक को रिलीज किया। इस पूरे घटनाक्रम और मरम्मत के कार्य के चलते मालगाड़ी श्रीनगर स्टेशन पर करीब 25 मिनट तक खड़ी रही। रेलवे विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस खराबी का पता नहीं चलता, तो घर्षण के कारण पहिए जाम हो सकते थे या आग लगने से गाड़ी पटरी से उतर (Derailment) सकती थी।
यह पहला मौका नहीं है जब गेटमैन रमेश चंद मीणा ने अपनी मुस्तैदी से रेलवे को किसी बड़े नुकसान से बचाया हो। इससे पहले भी वे इसी तरह एक अन्य मालगाड़ी में 'हॉट एक्सल' (Hot Axle) की गंभीर समस्या को समय रहते पकड़ चुके हैं। उनकी इसी कर्तव्यनिष्ठा और सजगता के लिए उन्हें पूर्व में डीआरएम अवार्ड (DRM Award) से भी सम्मानित किया जा चुका है। रमेश चंद की इस ताजा सतर्कता की भी रेल अधिकारियों और स्थानीय स्टाफ द्वारा जमकर सराहना की जा रही है।
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