कोटा। रेलवे बोर्ड की 'आवधिक स्थानांतरण नीति' (Periodic Transfer Policy) का कोटा रेल मंडल के कार्मिक विभाग में खुला उल्लंघन हो रहा है। संवेदनशील पदों पर बैठे कई कर्मचारी वर्षों से एक ही सीट पर जमे हुए हैं। आलम यह है कि स्थानांतरण आदेश जारी होने के हफ्तों बाद भी कर्मचारी कार्यभार नहीं छोड़ रहे हैं, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
बीते 18 फरवरी को कार्मिक विभाग ने आवधिक स्थानांतरण आदेश जारी किए थे। इसमें राजभाषा अनुभाग के एक मुख्य कार्यालय अधीक्षक का तबादला कार्मिक वाणिज्य अनुभाग में किया गया था। स्थानांतरण के 7 दिन बीत जाने के बाद भी उन्होंने नई जगह जॉइन नहीं किया है।
क्यों है संवेदनशील: राजभाषा अनुभाग में कैश इंप्रेस्ट, नगद पुरस्कार वितरण और निविदा (Tender) जैसी वित्तीय प्रक्रियाएं होती हैं।
सबसे चौंकाने वाला मामला कोऑर्डिनेशन सेल और विधि अनुभाग का है। यहाँ कई कर्मचारी सेवानिवृत्ति से पहले सालों तक उसी सीट पर रहे और रिटायर होने के बाद री-इंगेजमेंट (पुनः नियुक्ति) के आधार पर फिर से उन्हीं संवेदनशील पदों पर बैठ गए।
कोऑर्डिनेशन सेल: यह सेल निविदा और आपूर्ति जैसे कार्यों से जुड़ा है। यहाँ कार्यरत कर्मचारी के विरुद्ध पूर्व में शिकायतें भी सामने आई हैं।
विधि अनुभाग: यहाँ भी एक सेवानिवृत्त कार्मिक कल्याण निरीक्षक वर्षों से उसी पद पर काबिज हैं।
SBF (स्टाफ बेनिफिट फंड): यहाँ लाखों रुपये के व्यय वाले कार्य जैसे साइकिल-स्कूटर स्टैंड, कैंटीन निविदा और शिविर आयोजन होते हैं। एक कनिष्ठ कल्याण निरीक्षक लंबे समय से यह जिम्मेदारी संभाल रहे हैं, जबकि कुछ निविदाओं में शिकायतों की चर्चा भी आम है।
यूनियन सेल: यहाँ पदोन्नति के बाद भी कर्मचारी का तबादला नहीं किया गया, जबकि यह अनुभाग ट्रेड यूनियनों और वित्तीय व्यवस्थाओं से जुड़ा संवेदनशील क्षेत्र है।
यही हाल APAR, RTI, HRMS और वेतन शाखा का है। यहाँ के कर्मचारी भी आवधिक स्थानांतरण की परिधि में आते हैं, लेकिन सालों से एक ही अनुभाग में जमे हैं। विभागाध्यक्ष की स्टेनो भी वर्षों से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं।
रेलवे बोर्ड के स्पष्ट निर्देश हैं कि भ्रष्टाचार रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए संवेदनशील पदों पर बैठे कर्मचारियों का समय-समय पर तबादला जरूरी है। लेकिन कोटा मंडल के कार्मिक विभाग में मची इस 'मनमर्जी' ने अन्य विभागों के बीच भी गलत संदेश भेजा है।
"जो विभाग दूसरों का हिसाब-किताब रखता है, यदि वहां खुद नियमों का पालन नहीं हो रहा, तो पारदर्शिता की उम्मीद कैसे की जा सकती है? संवेदनशील पदों पर रोटेशन अनिवार्य होना चाहिए।"
— रेलवे कर्मचारी हलकों में चर्चा
राजभाषा अनुभाग: (नकद पुरस्कार एवं निविदाएं)
SBF शाखा: (कैंटीन एवं स्टैंड निविदा प्रक्रिया)
कोऑर्डिनेशन सेल: (विभागीय सूचना एवं आपूर्ति)
वेतन एवं बिल शाखा: (वित्तीय भुगतान)
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