रेल मंत्री के नए विजन से 20 साल का इंतजार होगा खत्म, मात्र 12 घंटे में होगा  अंडरपास  निर्माण

रेल मंत्री के नए विजन से 20 साल का इंतजार होगा खत्म, मात्र 12 घंटे में होगा अंडरपास निर्माण

कोटा। कोटा रेलवे स्टेशन के समीप संजय नगर और बापू कॉलोनी के पास स्थित बंद क्रॉसिंग गेट नंबर 108 पर अंडरपास बनने की राह अब आसान होती दिख रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव द्वारा हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यशाला में दिए गए क्रांतिकारी निर्देशों के बाद, पिछले 20 वर्षों से पटरियों के बीच बंटी आबादी में खुशी की लहर है।

रेल मंत्री का 'विजन': सुरक्षा और सुगमता एक साथ

रेल मंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि देश भर में जहाँ भी रेल पटरी के एक तरफ बस्ती और दूसरी तरफ श्मशान, कब्रिस्तान, स्कूल या खेत जैसे महत्वपूर्ण स्थान हैं, वहाँ 'जीवनदायिनी पुलियाओं' का निर्माण किया जाएगा।

  • मात्र 12 घंटे में निर्माण: आधुनिक तकनीक (Pre-cast segments) के जरिए इन पुलियाओं का निर्माण महज 12 घंटे के ब्लॉक में पूरा किया जा सकेगा।

  • डिजाइन पर जोर: पुलिया का डिजाइन ऐसा होगा कि आम आदमी साइकिल या मोटरसाइकिल के साथ आसानी से निकल सके और जलभराव की समस्या न हो।

  • समय सीमा: रेल मंत्री ने अधिकारियों को अगले 5-6 साल में देश भर में ऐसी सभी समस्याओं के समाधान के निर्देश दिए हैं।

कोटा का 'गेट नंबर 108': क्यों है यह अनिवार्य?

वर्ष 2006-07 में इस क्रॉसिंग गेट के बंद होने के बाद से संजय नगर और बापू कॉलोनी के लोग दो हिस्सों में बंट गए हैं। यहाँ रेल मंत्री द्वारा बताई गई सभी शर्तें सटीक बैठती हैं:

  1. शव यात्राओं का संकट: सबसे संवेदनशील पहलू यह है कि एक तरफ कब्रिस्तान है और दूसरी तरफ श्मशान, जबकि दोनों समुदायों की घनी आबादी विपरीत दिशाओं में रहती है। मजबूरन लोगों को शव यात्राएं पटरियों के बीच से निकालनी पड़ती हैं।

  2. सघन आबादी: यहाँ करीब दो दर्जन कॉलोनियां हैं, जहाँ के हजारों लोग रोजाना काम के सिलसिले में जान जोखिम में डालकर पटरी पार करते हैं।

  3. 160 की रफ्तार का खतरा: दिल्ली-मुंबई ट्रैक जल्द ही 160 किमी प्रति घंटा की रफ्तार के लिए तैयार हो रहा है, ऐसे में बिना अंडरपास के यहाँ कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

चुनौतियां और संघर्ष का इतिहास

स्थानीय निवासी, सामाजिक कार्यकर्ता और जन प्रतिनिधि लंबे समय से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को ज्ञापन सौंप चुके हैं। हालांकि, रेलवे ने पहले यहाँ लाइनों की अधिकता और जगह की कमी का हवाला देकर निर्माण से इनकार कर दिया था, लेकिन रेल मंत्री के नए 'कस्टमाइज्ड डिजाइन' वाले आदेश ने तकनीकी बाधाओं को दूर करने की नई उम्मीद जगाई है।

उम्मीद की किरण: यदि रेल मंत्री के निर्देशों के अनुरूप यहाँ 12 घंटे वाली तकनीक से छोटी पुलिया का निर्माण होता है, तो यह हजारों परिवारों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होगा।


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