कोटा। पश्चिम मध्य रेलवे के कोटा मंडल के अंतर्गत आने वाले सवाई माधोपुर स्टेशन पर परिचालन व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। रेलवे प्रशासन ने यहाँ से शंटर (Shunter) के पदों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इस निर्णय के बाद स्टेशन पर इंजनों और ट्रेनों के प्रबंधन को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं।
शंटरों के पद खत्म होने का सीधा असर लोको पायलटों की कार्यप्रणाली पर पड़ा है। अब लोको पायलटों को खुद ही निम्नलिखित अतिरिक्त कार्य करने पड़ रहे हैं:
ट्रेनों की शंटिंग प्रक्रिया को अंजाम देना।
इंजनों को ट्रेनों से कटवाना (Detaching)।
इंजनों को ट्रेनों के साथ जुड़वाना (Attaching)।
इससे न केवल लोको पायलटों पर काम का दबाव बढ़ा है, बल्कि ट्रेनों के परिचालन समय पर भी इसका असर पड़ सकता है।
मामले में एक चौंकाने वाला पहलू यह भी है कि पद समाप्त होने के बावजूद रेलवे ने अभी तक करीब आठ शंटरों का ट्रांसफर नहीं किया है।
इन सभी शंटरों को गंगापुर सिटी के लिए रिलीव किया जाना है।
स्थानांतरण प्रक्रिया में हो रही देरी के कारण रेलवे को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
काम न होने के बावजूद इन कर्मचारियों को नियमानुसार वेतन का भुगतान किया जा रहा है, जो सीधे तौर पर राजस्व की हानि है।
"जब पद समाप्त हो चुके हैं और काम की जिम्मेदारी लोको पायलटों को दी जा चुकी है, तो शंटरों को रिलीव करने में देरी समझ से परे है। इससे रेलवे के संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है।"
— रेलवे परिचालन से जुड़े सूत्र
| समस्या | प्रभाव |
| पद समाप्ति | सवाई माधोपुर से शंटर के पद खत्म। |
| अतिरिक्त बोझ | लोको पायलट खुद कर रहे इंजन अटैच/डिटैच। |
| प्रशासनिक लापरवाही | 8 शंटरों को गंगापुर सिटी के लिए रिलीव नहीं किया गया। |
| राजस्व हानि | बिना कार्य के कर्मचारियों को वेतन का भुगतान। |
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