सवाई माधोपुर: न्यायिक अधिकारियों ने संभाला मोर्चा, 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' के तहत 2300 से अधिक विद्यार्थियों को सिखाए साइबर सुरक्षा के गुर

सवाई माधोपुर: न्यायिक अधिकारियों ने संभाला मोर्चा, 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे' के तहत 2300 से अधिक विद्यार्थियों को सिखाए साइबर सुरक्षा के गुर

 

सवाई माधोपुर | 07 अप्रैल 2026

राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (RALSA) के निर्देशानुसार आज सवाई माधोपुर न्यायक्षेत्र में साइबर सुरक्षा को लेकर एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया गया। ‘जागरूकता, संरक्षण और न्याय तक समावेशी पहुंच’ विषय पर आयोजित इस विशेष पहल 'ट्रांसफॉर्मेटिव ट्यूजडे: नेविगेटिंग लाइफ लीगली' के तहत जिले के विभिन्न स्कूलों में विधिक साक्षरता शिविर लगाए गए, जिनसे कुल 2309 छात्र-छात्राएं लाभान्वित हुए।

जिला मुख्यालय पर दिग्गज जजों ने दी जानकारी

जिला मुख्यालय के प्रमुख विद्यालयों में न्यायिक अधिकारियों ने स्वयं पहुँचकर विद्यार्थियों और स्टाफ को साइबर ठगी के बढ़ते खतरों से आगाह किया:

  • जिला एवं सेशन न्यायाधीश देवेन्द्र दीक्षित ने मानटाउन बालिका स्कूल में कमान संभाली।

  • पारिवारिक न्यायालय न्यायाधीश राजेन्द्र शर्मा ने खिलचीपुर और विशेष न्यायाधीश मीनाक्षी जैन ने आलनपुर स्कूल में शिविर लिया।

  • अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश प्रियंका पारीक (साहूनगर), सचिव समीक्षा गौतम (सूरवाल मॉडल स्कूल), और CJM आशुतोष सिंह आढ़ा (हाउसिंग बोर्ड) सहित अन्य न्यायिक अधिकारियों ने अलग-अलग केंद्रों पर साइबर कानूनों की जानकारी दी।

इन साइबर खतरों से बचने की दी गई सलाह

शिविरों के दौरान वर्तमान में प्रचलित ठगी के आधुनिक तरीकों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  1. डिजिटल अरेस्ट व ई-ट्रेडिंग ठगी: डरा-धमकाकर या निवेश के नाम पर होने वाला फ्रॉड।

  2. बैंकिंग व लोन एप फ्रॉड: फर्जी लोन एप और ओटीपी शेयरिंग के खतरे।

  3. ऑनलाइन गेमिंग व बुलिंग: बच्चों को निशाना बनाने वाले गेम और इंटरनेट पर प्रताड़ना।

  4. हनीट्रैप व सेक्सटॉर्शन: ऑनलाइन दोस्ती के जरिए ब्लैकमेलिंग।

  5. जॉब फ्रॉड: घर बैठे कमाई के झूठे दावों से बचाव।

सुरक्षा के 'हथियार': टू-स्टेप वेरिफिकेशन और हेल्पलाइन 1930

न्यायिक अधिकारियों ने केवल खतरों को ही नहीं बताया, बल्कि उनसे बचने के तकनीकी उपाय भी साझा किए। विद्यार्थियों को टू-स्टेप वेरिफिकेशन अपनाने और भारत सरकार के सुरक्षा एप्स जैसे 'संचार साथी', 'चक्षु', 'ई-स्कैन बोट', 'एम-कवच टू' और 'टैफकॉप' के उपयोग की विधि समझाई गई। अधिकारियों ने जोर दिया कि किसी भी साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें।

गंगापुर सिटी, बौंली और बामनवास में भी शिविर

अभियान का असर केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि तहसीलों (तालुका) में भी न्यायिक अधिकारियों ने सक्रियता दिखाई:

  • गंगापुर सिटी: ADJ अखिलेश कल्याण, रेशमा खान और ACJM मीनाक्षी चौधरी ने स्थानीय स्कूलों में शिविर आयोजित किए।

  • बौंली: ACJM विकास नेहरा ने बौंली स्कूल में बच्चों को मोबाइल और डिजिटल उपकरणों के सावधानीपूर्वक उपयोग का संदेश दिया।

  • बामनवास व चौथ का बरवाड़ा: न्यायाधीश अंशिका दिनकर (पिपलाई) और हेमंत मेहरा ने ग्रामीणों और विद्यार्थियों को अनजान लिंक पर क्लिक न करने की हिदायत दी।

निष्कर्ष संदेश: न्यायिक अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि "सावधानी ही सुरक्षा है।" अनजान नंबर से आए लिंक या फाइल पर क्लिक करना आपकी निजी जानकारी और जमापूंजी के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।


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