कोटा/भवानीमंडी। कोटा-नागदा रेल खंड स्थित भवानीमंडी स्टेशन के पास 14 फरवरी की तड़के साप्ताहिक जयपुर-नागपुर एक्सप्रेस (22176) में बड़े पैमाने पर लूट और चोरी की घटना सामने आई है। पुलिस की वर्दी में आए करीब आधा दर्जन बदमाशों ने स्लीपर कोच के एक दर्जन से अधिक यात्रियों को अपना निशाना बनाया और लाखों का माल लेकर फरार हो गए।
पीड़ित यात्रियों के अनुसार, बदमाश खाकी वर्दी में थे, ताकि किसी को उन पर शक न हो। भवानीमंडी स्टेशन निकलने के बाद तड़के करीब 3:30 बजे बदमाशों ने ट्रेन के कई कोचों में एक साथ धावा बोला। यात्रियों के जागने और विरोध करने पर बदमाशों ने छीना-झपटी की और फिर कुरलासी स्टेशन के पास चेन पुलिंग कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए भाग निकले।
आईफोन की लूट: नागपुर निवासी आदिल खान ने बताया कि उनके भाई इमामुद्दीन का 80 हजार रुपये मूल्य का आईफोन बदमाश छीन ले गए। परिवार अजमेर दरगाह से लौट रहा था।
सीट से गिरी महिला: जयपुर की आंचल गुप्ता ने बताया कि उनके साथ सफर कर रही मीरा कंवर से जब बदमाशों ने पर्स छीना, तो झटके से वह सीट के नीचे गिर गईं। मीरा और उनकी बहन शशि कंवर के पर्स में नगदी, मोबाइल और जेवर थे।
दरगाह और खाटू श्याम के यात्री निशाना: नागपुर की शबाना और अमोल महंत भी इस लूट का शिकार हुए। किसी का बैग गया तो किसी का पर्स, जिसमें सोने-चांदी के जेवर, नगदी और ट्रेन के टिकट तक शामिल थे।
सूत्रों का कहना है कि इस पूरी वारदात के पीछे भवानीमंडी क्षेत्र का एक सक्रिय गैंग शामिल है। यह गिरोह पिछले काफी समय से कोटा-नागदा खंड के बीच सक्रिय है। यात्रियों ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस और जीआरपी को इस गैंग की जानकारी है, फिर भी कोई कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है।
ट्रेन के नागदा पहुँचने पर यात्रियों ने जीआरपी और आरपीएफ में शिकायतों का अंबार लगा दिया। अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction) भवानीमंडी होने के कारण नागदा और अन्य स्टेशनों से ये सभी शिकायतें कोटा जीआरपी को ट्रांसफर कर दी गई हैं।
रेल खंड में बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अन्य ट्रेनों में भी वारदातें नहीं थम रही हैं:
मेवाड़ एक्सप्रेस: 9 फरवरी को निजामुद्दीन-उदयपुर मेवाड़ एक्सप्रेस (AC कोच) से एक बदमाश महिला यात्री का पर्स ले उड़ा, जिसमें 5 लाख रुपये मूल्य के सोने के कंगन और नगदी थी।
मुंबई-जयपुर सुपरफास्ट: विक्रमगढ़ आलोट स्टेशन पर महिला यात्री अर्चना का मोबाइल चोरी हो गया।
वर्दी पहनकर लूट की इस घटना ने यात्रियों के मन में डर पैदा कर दिया है। सवाल यह है कि यदि लुटेरे वर्दी पहनकर ट्रेनों में घूम रहे हैं, तो यात्री असली और नकली पुलिस में फर्क कैसे करेंगे? और क्या रात के समय ट्रेनों में आरपीएफ/जीआरपी की गश्त केवल कागजों तक सीमित है?
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