कोटा: रेलवे वर्कशॉप में उस वक्त हड़कंप मच गया जब कबाड़ (स्क्रैप) के बीच बड़ी मात्रा में बिल्कुल नए और पैक आइटम बरामद हुए। चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रक भरकर आया यह माल पूरी तरह से नया है और अभी तक इसकी पैकिंग तक नहीं खोली गई है। इस घटना के बाद वर्कशॉप की स्टोर और सप्लाई चेन व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
वर्कशॉप के कर्मचारियों ने जब स्क्रैप के माल का निरीक्षण किया, तो वे दंग रह गए। उनके अनुसार:
सील बंद सामान: कबाड़ में मिले अधिकांश आइटम पूरी तरह पैक और सील बंद हैं।
नई कंडीशन: इन सामानों पर से अभी तक पॉलिथीन की सुरक्षा परत भी नहीं उतरी है, जिससे साफ है कि इनका एक बार भी उपयोग नहीं किया गया है।
अज्ञात स्रोत: फिलहाल यह सस्पेंस बना हुआ है कि ट्रक भरकर आया यह कीमती सामान आखिर किस विभाग या स्टोर से भेजा गया है और इसे 'स्क्रैप' की श्रेणी में क्यों डाला गया।
रेलवे में नियमानुसार, किसी भी सामान को तभी कबाड़ घोषित किया जाता है जब वह उपयोग के लायक न रहे या अपनी निर्धारित अवधि (Life-cycle) पूरी कर चुका हो। लेकिन बिल्कुल नए सामान का स्क्रैप यार्ड में पहुँचना दो ही बातों की ओर संकेत करता है:
बड़ी लापरवाही: बिना जांचे-परखे स्टॉक को कबाड़ में डाल देना।
मिलीभगत: कीमती नए सामान को कबाड़ के भाव बेचकर रेलवे को आर्थिक नुकसान पहुँचाने की साजिश।
वर्कशॉप में चर्चा है कि यदि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच की जाए, तो सप्लाई और स्टोर विभाग की बड़ी खामियां उजागर हो सकती हैं। कर्मचारियों का कहना है कि रेलवे की संपत्ति का इस तरह बर्बाद होना गंभीर मामला है और इसके जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
यह माल किस वाउचर या ऑर्डर के तहत स्क्रैप यार्ड भेजा गया?
क्या माल भेजने से पहले 'कंडम' घोषित करने की प्रक्रिया (Condemnation Process) अपनाई गई थी?
इस पूरे ट्रक लोड माल की कुल अनुमानित कीमत क्या है?
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