कोटा/जबलपुर। भारतीय रेलवे में हाल ही में संपन्न हुए मान्यता चुनावों के परिणामों का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। रेलवे प्रशासन द्वारा बनाए गए लगातार दबाव के बाद वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाइज यूनियन (WCREU) ने सरकारी आवासों में चल रहे अपने कार्यालयों को खाली करना शुरू कर दिया है। इसकी शुरुआत भोपाल मंडल से हुई है, जिसके बाद अब कोटा और जबलपुर मंडलों में भी हलचल तेज हो गई है।
प्रशासनिक सख्ती को देखते हुए भोपाल यूनियन ने बैकफुट पर आते हुए रेलवे प्रशासन को लिखित पत्र सौंपा है। इसमें यूनियन ने अगले 15 दिनों के भीतर सभी सरकारी आवासों में संचालित कार्यालयों को खाली करने का आश्वासन दिया है। माना जा रहा है कि भोपाल के इस कदम के बाद अब कोटा और जबलपुर मंडल में भी यूनियन कार्यालयों पर जल्द ही ताले लटक सकते हैं।
गौरतलब है कि मान्यता के लिए हुए गुप्त मतदान (Secret Ballot Election) में हार का सामना करने के बाद यूनियनों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं और विशेषाधिकार समाप्त हो गए हैं। रेलवे बोर्ड के नियमों के अनुसार, गैर-मान्यता प्राप्त यूनियनें सरकारी क्वार्टरों या जमीनों पर अपने कार्यालय संचालित नहीं कर सकतीं।
प्रशासन ने कार्यालय खाली न करने की स्थिति में सख्त आर्थिक दंड का प्रावधान किया है:
भारी जुर्माना: रेलवे ने समय रहते आवास खाली न करने पर यूनियन कार्यालयों के नाम पर करोड़ों रुपए की रिकवरी निकाल रखी है।
बढ़ता वित्तीय बोझ: यदि कार्यालय खाली करने में और देरी की जाती है, तो यह पेनल्टी राशि और अधिक बढ़ सकती है, जिससे यूनियन के लिए भविष्य में बड़ी वित्तीय मुसीबत खड़ी हो जाएगी।
कोटा रेल मंडल में भी एम्पलाइज यूनियन के कई कार्यालय रेलवे कॉलोनियों और मुख्य स्टेशन परिसर के पास सरकारी भवनों में संचालित हैं। भोपाल के घटनाक्रम के बाद स्थानीय पदाधिकारी भी अब कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई से बचने के लिए विकल्पों की तलाश कर रहे हैं।
#RailwayUnion #WCREU #RailwayNews #KotaDivision #WCR #RailwayElection #OfficeEviction #RailwayAdministration #KotaNews
No comments yet. Be the first to comment!
Please Login to comment.
© G News Portal. All Rights Reserved.