कोटा रेलवे स्टेशन पर शनिवार रात रेलवे प्रशासन की एक बड़ी लापरवाही और तकनीकी तालमेल की कमी का मामला सामने आया है। जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या: 14813) में डिब्बे जोड़ने के दौरान हुई गड़बड़ी के कारण यह ट्रेन कोटा जंक्शन पर करीब ढाई घंटे तक खड़ी रही। इस भारी देरी की वजह से आम यात्रियों को भीषण गर्मी में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
रेलवे कर्मचारियों से मिली जानकारी के अनुसार, कोटा में आयोजित 'वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ' के एक कार्यक्रम में शामिल होने आए रेल कर्मचारियों को वापस भोपाल लौटना था। इसके लिए इस ट्रेन में कोटा से दो अतिरिक्त थर्ड एसी (3AC) कोच जोड़े जाने थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इन डिब्बों को जोड़ने की तैयारी दिनभर से चल रही थी, लेकिन इसके बावजूद ऐन वक्त पर काम में बड़ी लापरवाही सामने आई।
तकनीकी नियमों और कपलिंग की समस्या के चलते इन दोनों एसी कोचों को आगे इंजन के ठीक पीछे जोड़ने में कर्मचारियों को भारी मशक्कत करनी पड़ी। जैसे-तैसे डिब्बे तो जोड़ दिए गए, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण इनमें बिजली की सप्लाई (Power Supply) शुरू नहीं हो सकी। नतीजतन, कोचों के अंदर पूरी तरह अंधेरा रहा और एसी (AC) सिस्टम भी ठप पड़ा रहा।
यात्रियों का हंगामा: डिब्बों में अंधेरा और उमस होने के बावजूद रेल अधिकारियों ने ट्रेन को जबरन आगे के लिए रवाना कर दिया। इससे नाराज और परेशान रेल कर्मचारियों ने प्लेटफॉर्म छोड़ते ही चेन पुलिंग (Chain Pulling) कर ट्रेन को वहीं रोक दिया। कर्मचारियों ने साफ अल्टीमेटम दिया कि जब तक लाइट और एसी चालू नहीं होगा, ट्रेन आगे नहीं जाएगी।
आखिरकार रेलवे प्रबंधन को झुकना पड़ा और तकनीकी विफलता को स्वीकार करते हुए दोनों एसी कोचों को आगे से काटकर वापस ट्रेन के सबसे पिछले हिस्से में जोड़ा गया। इस पूरे ड्रामे और फेरबदल के चक्कर में ट्रेन कोटा स्टेशन पर ढाई घंटे तक खड़ी रही और रात 12:00 बजे के बजाय देर रात 2:30 बजे रवाना हो सकी। कोटा से पिटने के बाद यह ट्रेन बारां रेलवे स्टेशन पहुँचते-पहुँचते सवा तीन घंटे (3:15 घंटे) लेट हो चुकी थी।
जोधपुर-भोपाल एक्सप्रेस के ढाई घंटे तक ट्रैक रोके रखने का खामियाजा अन्य ट्रेनों को भी भुगतना पड़ा। इसका सीधा असर कोटा-इटावा एक्सप्रेस (गाड़ी संख्या: 19811) पर देखा गया। यह ट्रेन भी अपने निर्धारित समय से करीब दो घंटे की देरी से रात 1:30 बजे के बाद ही कोटा से रवाना हो सकी, जिससे उसके यात्री भी आधी रात को परेशान होते रहे।
इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे के तकनीकी विंग और स्थानीय प्रबंधन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि जब दिनभर से तैयारी चल रही थी, तो ऐन वक्त पर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।
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