कोटा। कोटा रेल मंडल के टीटीई स्टाफ और रेल प्रशासन के बीच नए ड्यूटी रोस्टर को लेकर टकराव की स्थिति पैदा हो गई है। टीटीई (ट्रेन टिकट परीक्षकों) का आरोप है कि नए रोस्टर में उनके साप्ताहिक विश्राम (Weekly Rest) का कोई प्रावधान नहीं किया गया है, जिसके चलते कर्मचारी मानसिक और शारीरिक तनाव से गुजर रहे हैं।
टीटीई स्टाफ ने इस विसंगति को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उनका कहना है कि:
हाजिरी रजिस्टर में खामी: यह समस्या केवल कोटा लॉबी के हाजिरी रजिस्टर और रोस्टर में देखी जा रही है।
मंडल में दोहरा मापदंड: कोटा मंडल के ही अन्य स्टेशनों जैसे सवाई माधोपुर, सोगरिया और गंगापुर सिटी के रोस्टर में साप्ताहिक रेस्ट का स्पष्ट प्रावधान है।
समान कार्य, असमान नियम: जब सभी लॉबियों में वर्किंग घंटे लगभग एक समान हैं, तो कोटा के स्टाफ के साथ इस तरह का भेदभाव क्यों किया जा रहा है?
रोस्टर की सबसे बड़ी खामी टीटीई की ड्यूटी टाइमिंग को लेकर बताई जा रही है। स्टाफ के अनुसार, उन्हें एक ही दिन (Same Day) में दो बार ड्यूटी पर भेजा जा रहा है। ऐसी तीन प्रमुख ट्रेनें हैं जिनमें यह 'सेम डे ड्यूटी' सिस्टम लागू किया गया है। इसके कारण:
कर्मचारियों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है।
टीटीई अत्यधिक तनाव (Stress) में काम करने को मजबूर हैं।
थकान के कारण उनकी कार्यक्षमता और रेल यात्रियों के साथ व्यवहार पर भी विपरीत असर पड़ रहा है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए टीटीई स्टाफ ने मंगलवार को वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक (Sr. DCM) सौरभ जैन से मुलाकात कर अपनी समस्याओं से अवगत कराया। जैन ने कर्मचारियों को जल्द ही रोस्टर में आवश्यक संशोधन करने का आश्वासन दिया है।
वहीं, दूसरी ओर आईआरटीसीएसओ (IRTCSO) ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही रोस्टर में सुधार कर साप्ताहिक रेस्ट बहाल नहीं किया गया, तो संगठन उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
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