कोटा: कोटा रेल मंडल में ट्रैकमैनों (Track Maintainers) से उनकी योग्यता और ग्रेड-पे के विपरीत कार्य करवाने का मामला गरमाता जा रहा है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ ने रेल प्रशासन पर 'मनमर्जी' का आरोप लगाते हुए इसे रेलवे संरक्षा के साथ सीधा खिलवाड़ करार दिया है।
संघ का आरोप है कि मंडल के कई डिपो में कर्मचारियों के ग्रेड-पे का ध्यान रखे बिना उनसे काम लिया जा रहा है:
ग्रेड की अदला-बदली: कम ग्रेड-पे वाले कर्मचारियों से उच्च ग्रेड के काम और उच्च ग्रेड-पे वाले वरिष्ठ कर्मचारियों से निचले स्तर के काम करवाए जा रहे हैं।
लाखेरी डिपो का उदाहरण: यहाँ ₹2800 और ₹2400 पे-ग्रेड वाले अनुभवी कर्मचारियों को ऑफिस कार्य, ट्रॉली संचालन, नाइट ड्यूटी और पेट्रोलिंग जैसे कार्यों में झोंका जा रहा है, जबकि उनके अनुभव का उपयोग ट्रैक की मुख्य मरम्मत और संरक्षा में होना चाहिए।
रेलवे मजदूर संघ ने प्रशासन को लिखे पत्र में कड़ा विरोध दर्ज कराया है। संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि:
इस मुद्दे को पहले भी पीएनएम (PNM) बैठक में प्रमुखता से उठाया गया था।
उस समय प्रशासन ने व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर अब तक कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अधिकारियों की इस मनमर्जी से कर्मचारियों में भारी असंतोष है, जिसका सीधा असर उनके मानसिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता पर पड़ रहा है।
विशेषज्ञों और संघ का मानना है कि यदि तकनीकी रूप से दक्ष और वरिष्ठ ट्रैक मेंटेनर्स को उनके मूल कार्य से हटाकर अन्य ड्यूटी पर लगाया जाएगा, तो रेल पटरियों की देखरेख प्रभावित होगी। यह स्थिति रेल परिचालन की सुरक्षा के लिहाज से बेहद जोखिम भरी हो सकती है।
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