भरतपुर | राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों और पेंशनर्स की जीवनरेखा मानी जाने वाली आरजीएचएस (RGHS) योजना इन दिनों खुद 'वेंटिलेटर' पर नजर आ रही है। भरतपुर जिले सहित पूरे प्रदेश में निजी अस्पतालों द्वारा इलाज बंद किए जाने से मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं। हालांकि, सरकार अब इसे नए इंश्योरेंस मॉडल पर शिफ्ट करने की अंतिम तैयारी कर रही है।
प्रदेश के अधिकांश निजी अस्पतालों ने भुगतान विवाद और बकाया राशि के चलते RGHS के तहत मरीजों को भर्ती करना बंद कर दिया है।
भरतपुर का हाल: जिले के लगभग 58,389 पेंशनर्स और हजारों कर्मचारी इस समस्या से सीधे प्रभावित हैं।
मरीजों की मजबूरी: स्थानीय स्तर पर इलाज न मिलने के कारण गंभीर मरीजों को जयपुर रेफर किया जा रहा है, लेकिन वहां भी निजी अस्पताल संचालकों ने हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके चलते लोगों को अपनी जेब से भारी खर्च कर निजी इलाज कराना पड़ रहा है।
सरकार अब RGHS को ट्रस्ट मोड से हटाकर इंश्योरेंस मोड पर लाने जा रही है। यह बदलाव राज्य की 'मां' (MA) योजना के सफल मॉडल से प्रेरित है।
इंश्योरेंस मॉडल के फायदे:
निर्बाध भुगतान: बीमा कंपनी के जरिए अस्पतालों को क्लेम का भुगतान समय पर और सुचारू रूप से होगा।
अस्पतालों की वापसी: भुगतान संबंधी विवाद खत्म होने पर निजी अस्पताल फिर से योजना से जुड़ेंगे।
पारदर्शिता: क्लेम और इलाज की सीमा को लेकर प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होगी।
सरकार के लिए मौजूदा मॉडल वित्तीय रूप से काफी महंगा साबित हो रहा है। तुलनात्मक रूप से देखें तो:
| योजना | लाभार्थी संख्या | सालाना खर्च (लगभग) |
| आरजीएचएस (RGHS) | 50 लाख (10 लाख परिवार) | ₹4,000 करोड़ |
| मां (MA) योजना | 7 करोड़ | ₹3,500 करोड़ |
यही कारण है कि कम लाभार्थियों के बावजूद अधिक खर्च होने से सरकार पर वित्तीय दबाव बढ़ गया है, जिसे कम करने के लिए बीमा मॉडल जरूरी माना जा रहा है।
चिकित्सा विभाग और सरकार के अनुसार, इंश्योरेंस मॉडल को लागू करने की तैयारी अंतिम चरण में है।
"हमारी कोशिश है कि इस महीने के अंत तक या अगले महीने (जून) तक इंश्योरेंस मॉडल लागू कर दिया जाए। हम पैकेट रेट और क्लेम प्रक्रियाओं को लेकर कर्मचारियों और पेंशनर्स को विश्वास में ले रहे हैं।"
— चिकित्सा मंत्री, राजस्थान सरकार
पेंशनर्स समाज के अध्यक्ष डोरीलाल शर्मा का कहना है कि लंबे समय से जिला प्रशासन के माध्यम से ज्ञापन देकर योजना को बहाल करने की मांग की जा रही है। बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं बंद होना उनके जीवन से खिलवाड़ करने जैसा है।
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