गंगापुर सिटी रेलवे अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी, कर्मचारियों को निजी अस्पतालों का सहारा

गंगापुर सिटी रेलवे अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी, कर्मचारियों को निजी अस्पतालों का सहारा

गंगापुर सिटी : कोटा मंडल का गंगापुर रेलवे अस्पताल इस समय गंभीर स्टाफ की कमी से जूझ रहा है। अस्पताल में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर भी नहीं है, जिसकी वजह से रेल कर्मचारियों को मजबूरी में निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही अस्पताल की व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे।

हालात चिंताजनक

गंगापुर में 50 बेड का रेलवे अस्पताल है, जिस पर गंगापुर से लेकर मुंडेसी रामपुर तक के लगभग 15,000 सेवारत और सेवानिवृत्त कर्मचारी आश्रित हैं। हालांकि, यहां की स्थिति बेहद खराब है। अस्पताल में सिर्फ 9 नर्सिंग स्टाफ, 5 फार्मासिस्ट और एक अकेला ड्रेसर है, जबकि यहां की औसत ओपीडी 300 मरीजों की है। एकमात्र ड्रेसर पर मेडिकल वाहन और रनिंग स्टाफ के फर्स्ट एड बॉक्स भरने की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी है, जिससे कर्मचारियों को काफी परेशानी हो रही है।

स्टाफ की कमी और असमान वितरण

कर्मचारियों का आरोप है कि कमी होने के बावजूद भी गंगापुर से स्टाफ को कम किया जा रहा है। पहले यहां तीन ड्रेसर थे, लेकिन अब सिर्फ एक ही रह गया है। दो ड्रेसर में से एक को कोटा और दूसरे को तुगलकाबाद भेज दिया गया। इसी तरह, एक नर्स और एक फार्मासिस्ट को भी कोटा ट्रांसफर कर दिया गया है।

दूसरी ओर, कोटा में 104 बेड के अस्पताल में 20 नर्सिंग स्टाफ, 18 फार्मासिस्ट और 17 ड्रेसर कार्यरत हैं। यहां तक कि वर्कशॉप में भी तीन ड्रेसर लगे हुए हैं, जबकि मुख्य मंडल चिकित्सालय केवल 5 मिनट की दूरी पर है। कर्मचारियों का कहना है कि कोटा में 600 की औसत ओपीडी के लिए जरूरत से ज्यादा स्टाफ है, जबकि गंगापुर जैसे महत्वपूर्ण अस्पताल में स्टाफ की भारी कमी है। रेलवे के आदेशों के बावजूद कोटा में बिना डॉक्टर की डिस्पेंसरियां भी चल रही हैं, जिससे रेलवे को आर्थिक नुकसान हो रहा है।

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